रविवार, 4 जून 2017

हास्यानन्द,
आओ हंसॆ हम आनन्दित होकर, हंस-हंस कर हम आनन्दित होंये!दुख-दर्द का मरहम हास्य है! जहॉ हास्य है,वहॉ प्रेम है,जहॉ प्रेम,वहॉ मधुर भाष्य है! हंसना है,हंसाना है,इस बेमोल के काम में क्या आलस्य है!
दोस्तों,
सुबह उठते ही सुखद पल की यादों के साथ मुस्कुराईए,कुछ अपने ही मूर्खता पर हंसिए,विपरीत परिस्थिति में मुस्कुराना वीरता है,किसी के चेहरे में हंसी लाना पुण्य का काम है!
हास्याकार,

स्वप्नदर्शी


हास्यानन्द, आओ हंसॆ हम आनन्दित होकर, हंस-हंस कर हम आनन्दित होंये!दुख-दर्द का मरहम हास्य है! जहॉ हास्य है,वहॉ प्रेम है,जहॉ प्रेम,वहॉ मधुर भ...